आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "dukhtar-e-shaikh"
शेर के संबंधित परिणाम "dukhtar-e-shaikh"
शेर
ऐ 'ज़ौक़' देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा
छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
शेर
न छेड़ ऐ शैख़ हम यूँही भले चल राह लग अपनी
तुझे तो बीवियाँ सूझी हैं हम बेज़ार बैठे हैं
ए. डी. अज़हर
शेर
मोतकिफ़ हो शैख़ अपने दिल में मस्जिद से निकल
साहिब-ए-दिल की बग़ल में दिल इबादत-ख़ाना है
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
शेर
कभू जो शैख़ दिखाऊँ मैं अपने बुत के तईं
ब-रब्ब-ए-क'अबा तुझे हसरत-ए-हरम न रहे
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
शेर
एक पत्थर पूजने को शैख़ जी काबे गए
'ज़ौक़' हर बुत क़ाबिल-ए-बोसा है इस बुत-ख़ाने में
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
शेर
शैख़ इस बुत-शिकनी पर न हो इतना मग़रूर
तू ने तोड़ा नहीं अपना बुत-ए-पिंदार हनूज़
शेख़ ग़ुलाम अली रासिख़
शेर
न बंद कर इसे फ़स्ल-ए-बहार में साक़ी
न डाल दुख़्तर-ए-रज़ का अचार शीशे में
मिर्ज़ा मासिता बेग मुंतही
शेर
सुना है मोहतसिब भी ताक में है दुख़्तर-ए-रज़ की
इलाही रख ले तू हुर्मत शराब-ए-अर्ग़वानी की
मोहसिन काकोरवी
शेर
किया है मिल के दोनों ने जो रुस्वा दुख़्तर-ए-रज़ को
खिंची बैठी है शीशे से भरी बैठी है साग़र से
जलील मानिकपूरी
शेर
हुज़ूर-ए-दुख़्तर-ए-रज़ हाथ पाँव काँपते हैं
तमाम मस्तों को रअशा है रू-ब-रू-ए-शराब