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शेर
ये फ़र्त-ए-शौक़ कि सूरत तिरी नहीं देखी
मगर जबीं तिरी ताज़ीम के लिए ख़म है
जागेश्वर दयाल नश्तर कानपुरी
शेर
वो पढ़ें भी तो खुले क्या मिरे मक्तूब का हाल
है सियह फ़र्त-ए-निगारिश से सरासर काग़ज़
सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम
शेर
कोई भूका जो फ़र्त-ए-ज़ोफ़ से कुछ लड़खड़ा जाए
तो दुनिया तंज़ कसती है उसे मद-मस्त कहती है
ज़मीर अतरौलवी
शेर
यार की फ़र्त-ए-नज़ाकत का हूँ मैं शुक्र-गुज़ार
ध्यान भी उस का मिरे दिल से निकलने न दिया
असद अली ख़ान क़लक़
शेर
किसे फ़ुर्सत कि फ़र्ज़-ए-ख़िदमत-ए-उल्फ़त बजा लाए
न तुम बेकार बैठे हो न हम बेकार बैठे हैं
आज़ाद अंसारी
शेर
तिरी महफ़िल में फ़र्क़-ए-कुफ़्र-ओ-ईमाँ कौन देखेगा
फ़साना ही नहीं कोई तो उनवाँ कौन देखेगा
अज़ीज़ वारसी
शेर
महक में ज़हर की इक लहर भी ख़्वाबीदा रहती है
ज़िदें आपस में टकराती हैं फ़र्क़-ए-मार-ओ-संदल कर
अज़ीज़ हामिद मदनी
शेर
तो शराफ़तों का मक़ाम है तो सदाक़तों का दवाम है
जहाँ फ़र्क़-ए-शाह-ओ-गदा नहीं तिरे दीन का वो निज़ाम है
नासिर शहज़ाद
शेर
हर जगह चोरी का चर्चा हर जगह है लूट-मार
दिन-दहाड़े लुट रहा है हर तरफ़ फ़र्द-ए-बशर
इस्मतुल्लाह इस्मत बेग
शेर
क्यूँ ध्यान बटाती है मिरा गर्दिश-ए-दुनिया
हट जा कि न फ़र्क़ आए मिरी लग़्ज़िश-ए-पा में