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शेर
दाम-ए-हर-मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
देखें क्या गुज़रे है क़तरे पे गुहर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
ज़िंदगी इक ख़्वाब है ये ख़्वाब की ताबीर है
हल्क़ा-ए-गेसू-ए-दुनिया पाँव की ज़ंजीर है
उबैदुल्लह सिद्दीक़ी
शेर
हल्क़ा-ए-ज़ंजीर से निकला न ये पा-ए-जुनूँ
ग़म नहीं बाहर गया गो हल्क़ा-ए-इस्लाम से
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
शेर
जो जान छिड़कते थे वही कहते हैं मुझ से
तू हल्क़ा-ए-अहबाब में शामिल ही कहाँ था
मोहम्मद मुस्तहसन जामी
शेर
घर के सन्नाटे तिरे हल्क़ा-ए-आग़ोश में हूँ
मेहरबाँ तू ने मुझे दश्त में जाने न दिया
सय्यद कामरान ज़ुबैर कामी
शेर
ये सच है हम को भी खोने पड़े कुछ ख़्वाब कुछ रिश्ते
ख़ुशी इस की है लेकिन हल्क़ा-ए-शर से निकल आए