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शेर
दश्त-ए-जुनूँ की ख़ाक उड़ाने वालों की हिम्मत देखो
टूट चुके हैं अंदर से लेकिन मन-मानी बाक़ी है
कुमार पाशी
शेर
क़स्र-ए-दिल कुछ इस क़दर टूटा हुआ है एहतमाम
उन के बस इक लम्स भर से ख़ाक में मिल जाए गा