aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "janam-din..."
ख़िज़ाँ की रुत है जनम-दिन है और धुआँ और फूलहवा बिखेर गई मोम-बत्तियाँ और फूल
घिरा हुआ हूँ जनम-दिन से इस तआक़ुब मेंज़मीन आगे है और आसमाँ मिरे पीछे
मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँजनम-दिन है अकेला रो रहा हूँ
हुज़ूर आप तकल्लुफ़ में क्यों पड़े हुए हैंमरे हुओं के जनम-दिन नहीं मनाता कोई
माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया हैआज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है
जब वस्ल का आएगा तिरे साथ सनम दिनउस दिन को हक़ीक़त में कहूँगा मैं जनम-दिन
एक दिन अख़बार में कुछ यूँ ख़बर थी बेश-ओ-कमएक घर में एक ही दिन सात बच्चों का जनम
ठहर गया है दिल का जानादिल का जाना ठहर गया है
बाँट डाले ऐसे हम ने दिल के टुकड़े काट करजन्म दिन पे बाँटते हैं केक जैसे काट कर
दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जानादिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
अक़्ल ने तर्क-ए-तअल्लुक़ को ग़नीमत जानादिल को बदले हुए हालात पे रोना आया
उठा हिजाब तो बस दीन-ओ-दिल दिए ही बनीजनाब-ए-शैख़ को दावा था पारसाई का
गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिनऐसा लगा बसर हुए जन्नत में चार दिन
तुझे इस गाँव से जाना है इक दिनहवेली क्यूँ बनाना चाहता है
जो आया है उसे जाना है इक दिनअज़ल से तो यही इक सिलसिला है
फिर वहीं लौट के जाना होगायार ने कैसी रिहाई दी है
मसाइब और थे पर दिल का जानाअजब इक सानेहा सा हो गया है
मेरे दिल की शाख़ पे जानाँहर मौसम में तू खिलता है
तमाम दिन की तलब राह देखती होगीजो ख़ाली हाथ चले हो तो घर नहीं जाना
नए साल में पिछली नफ़रत भुला देंचलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें
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