आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mana.a-e-gustaaKHii"
शेर के संबंधित परिणाम "mana.a-e-gustaaKHii"
शेर
तू है मअ'नी पर्दा-ए-अल्फ़ाज़ से बाहर तो आ
ऐसे पस-मंज़र में क्या रहना सर-ए-मंज़र तो आ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
शेर
ऐ 'फ़ज़ा' इतनी कुशादा कब थी मअ'नी की जिहत
मेरे लफ़्ज़ों से उफ़ुक़ इक दूसरा रौशन हुआ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
शेर
मोहब्बत मअ'नी ओ अल्फ़ाज़ में लाई नहीं जाती
ये वो नाज़ुक हक़ीक़त है जो समझाई नहीं जाती
शेरी भोपाली
शेर
सलीम अहमद
शेर
मअ'नी-ए-रौशन जो हों तो सौ से बेहतर एक शेर
मतला-ए-ख़ुर्शीद काफ़ी है पए-दीवान-ए-सुब्ह