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शेर
तुझे किस बात का ग़म है वो इतना पूछ लें मुझ से
वो इतना पूछ लें मुझ से तो फिर किस बात का ग़म है
मुशताक़ हुसैन ख़ान हाशमी मुश्ताक़
शेर
इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई
दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई