aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "pamba"
पम्बा-दर-गोश समझते हैं कहीं हम को 'असद'ऊँची आवाज़ में जो शो'ला-फ़िशाँ बोलते हैं
उस ने आवारा-मिज़ाजी को नया मोड़ दियापा-ब-ज़ंजीर किया और मुझे छोड़ दिया
पा-ब-गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौनदस्त-बस्ता शहर में खोले मिरी ज़ंजीर कौन
जिस्म क्या रूह की है जौलाँ-गाहरूह क्या इक सवार-ए-पा-ब-रकाब
पा-ब-गिल बे-ख़ुदी-ए-शौक़ से मैं रहता थाकूचा-ए-यार में हालत मिरी दीवार की थी
पय-ब-पय तलवार चलती है यहाँ आफ़ात कीदस्त-ओ-बाज़ू की ख़बर लूँ तो समझिए सर गया
पा-ब-जौलाँ तो हर इक शख़्स यहाँ है 'अम्बर'तिरी ज़ंजीर ही क्यूँ शोर बपा करती है
उसे पा-ब-गिल न रखता जो ख़याल-ए-तीरा-बख़्तीजिसे ज़र्रा कह रहे हो यही इक शरार होता
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