aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "parakh"
टटोलो परख लो चलो आज़मा लोख़ुदा की क़सम बा-ख़ुदा आदमी हूँ
नाक़िदो तुम तो मिरे फ़न की परख रहने दोअपने सोने को मैं पीतल नहीं होने दूँगा
जौहरी क्यों नहीं परख पायागोलकुंडा की खान थे हम तो
है दीदा-वर तो एक नज़र में परख मुझेलाज़िम नहीं किसी को कई बार देखना
नगरी नगरी फिरा मुसाफ़िर घर का रस्ता भूल गयाक्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया
औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र देहाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे
क्यूँ परखते हो सवालों से जवाबों को 'अदीम'होंट अच्छे हों तो समझो कि सवाल अच्छा है
काश देखो कभी टूटे हुए आईनों कोदिल शिकस्ता हो तो फिर अपना पराया क्या है
तिरे सिवा भी कहीं थी पनाह भूल गएनिकल के हम तिरी महफ़िल से राह भूल गए
जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करेंबच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए
हाँ वो नहीं ख़ुदा-परस्त जाओ वो बेवफ़ा सहीजिस को हो दीन ओ दिल अज़ीज़ उस की गली में जाए क्यूँ
इक ख़ौफ़-ए-बे-पनाह है आँखों के आर-पारतारीकियों में डूबता लम्हा है सामने
मिलती नहीं पनाह हमें जिस ज़मीन परइक हश्र उस ज़मीं पे उठा देना चाहिए
गुलशन-परस्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़काँटों से भी निबाह किए जा रहा हूँ मैं
शायद हमारे हिज्र में लफ़्ज़ों का हाथ थाइक लफ़्ज़-ए-ग़ैर ने तो पराया ही कर दिया
सूरत छुपाइए किसी सूरत-परस्त सेहम दिल में नक़्श आप की तस्वीर कर चुके
ख़ून अपना हो या पराया होनस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर
वो काफ़िर-निगाहें ख़ुदा की पनाहजिधर फिर गईं फ़ैसला हो गया
इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुलतू ने जिस फूल को पाला वो पराया होगा
ज़िंदगानी का लुत्फ़ तो 'अज़्मत'सिर्फ़ तूफ़ान की पनाह में है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books