aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "pasa.ndiyaa.n"
ज़र्ब-उल-मसल हैं अब मिरी मुश्किल-पसंदियाँसुलझा के हर गिरह को फिर उलझा रहा हूँ मैं
आईना रू-ब-रू रख और अपनी छब दिखानाक्या ख़ुद-पसंदियाँ हैं क्या ख़ुद-नुमाईयाँ हैं
न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादीतअल्लुक़ात की पाबंदियाँ निभाते हुए
क्यूँ सदा पहने वो तेरा ही पसंदीदा लिबासकुछ तो मौसम के मुताबिक़ भी सँवरना है उसे
हसद का रंग पसंदीदा रंग है सब कायहाँ किसी को कोई अब दुआ नहीं देता
बू-ए-इक़रार भी आती हो जो इंकार के साथऐसे इंकार पसंदीदा हैं इक़रार के साथ
मैं ख़ानदान की पाबंदियों से वाक़िफ़ थीख़ुदा का शुक्र है उस शख़्स ने वफ़ा नहीं की
तुम जो चाहो वो करते फिरते होसारी पाबंदियाँ हमी पर हैं
पैग़ाम तो उन का आया है तुम शहर में 'तिश्ना' आ जाओसहरा है पसंदीदा हम को हम शहर में जा कर क्या करते
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