aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sag-e-ham-naam"
ये तो सच है कि हम तुझे पा न सके तिरी याद भी जी से भुला न सकेतिरा दाग़ है दिल में चराग़-सिफ़त तिरे नाम की ज़ेब-ए-गुलू-कफ़नी
रास आई है न आएगी ये दुनिया लेकिनरोक रक्खा है मुझे कूच की तय्यारी ने
शिकम की आग लिए फिर रही है शहर-ब-शहरसग-ए-ज़माना हैं हम क्या हमारी हिजरत क्या
इस शहर को रास आई हम जैसों की गुम-नामीहम नाम बताते तो ये शहर भी जल जाता
देखिए लाती है उस शोख़ की नख़वत क्या रंगउस की हर बात पे हम नाम-ए-ख़ुदा कहते हैं
तालिब-ए-ख़ैर न होंगे कभी इंसान से हमनाम उस का है बशर उस में है शर दो-बटा-तीन
मालूम जो होता हमें अंजाम-ए-मोहब्बतलेते न कभी भूल के हम नाम-ए-मोहब्बत
इक अंदाज़-ए-वारफ़्तगी है न पूछोकिसे देखता हूँ कहाँ देखता हूँ
तअल्लुक़ है न अब तर्क-ए-तअल्लुक़ख़ुदा जाने ये कैसी दुश्मनी है
बहर-ए-बीमार दवा है न दुआक्या इसे चारागरी कहते हैं
चमन से रुख़्सत-ए-गुल है न लौटने के लिएतो बुलबुलों का तड़पना यहाँ पे जाएज़ है
ग़म-ए-आक़िबत है न फ़िक्र-ए-ज़मानापिए जा रहे हैं जिए जा रहे हैं
हर मौज-ए-तुंद जानती है ना-ख़ुदाइयाँतूफ़ाँ तो मेरे साथ है गर नाख़ुदा नहीं
महरूम है नामा-दार-ए-दुनियापानी से तिही हबाब देखा
ख़ुशी विसाल की अब है न रंज-ए-तन्हाईये किस मक़ाम पे मुझ को हयात ले आई
शब ओ रोज़ जैसे ठहर गए कोई नाज़ है न नियाज़ हैतिरे हिज्र में ये पता चला मिरी उम्र कितनी दराज़ है
न नशेमन है न है शाख़-ए-नशेमन बाक़ीलुत्फ़ जब है कि करे अब कोई बर्बाद मुझे
कहते थे हम न देख सकें रोज़-ए-हिज्र कोपर जो ख़ुदा दिखाए सो नाचार देखना
वादे पे तुम न आए तो कुछ हम न मर गएकहने को बात रह गई और दिन गुज़र गए
शिकस्त-ए-ज़िंदगी वैसे भी मौत ही है नातू सच बता ये मुलाक़ात आख़री है ना
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