aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sameto"
आँखें खोलो ख़्वाब समेटो जागो भी'अल्वी' प्यारे देखो साला दिन निकला
कहानी को समेटो जल्द 'फ़हमी'थके हैं लोग सोना चाहते हैं
हमारी आँख के आँसू समेटोतुम्हारा इस से ख़र्चा चल रहा है
क्यूँ परखते हो सवालों से जवाबों को 'अदीम'होंट अच्छे हों तो समझो कि सवाल अच्छा है
अक्स-ए-ख़ुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोईऔर बिखर जाऊँ तो मुझ को न समेटे कोई
बजा कहे जिसे आलम उसे बजा समझोज़बान-ए-ख़ल्क़ को नक़्क़ारा-ए-ख़ुदा समझो
राह में बैठा हूँ मैं तुम संग-ए-रह समझो मुझेआदमी बन जाऊँगा कुछ ठोकरें खाने के बाद
जाती है धूप उजले परों को समेट केज़ख़्मों को अब गिनूँगा मैं बिस्तर पे लेट के
ये कार-ए-ज़िंदगी था तो करना पड़ा मुझेख़ुद को समेटने में बिखरना पड़ा मुझे
देखने वालो तबस्सुम को करम मत समझोउन्हें तो देखने वालों पे हँसी आती है
बुझा है दिल तो न समझो कि बुझ गया ग़म भीकि अब चराग़ के बदले चराग़ की लौ है
मुझे मनाओ नहीं मेरा मसअला समझोख़फ़ा नहीं मैं परेशान हूँ ज़माने से
हमला है चार सू दर-ओ-दीवार-ए-शहर कासब जंगलों को शहर के अंदर समेट लो
दुनिया पसंद आने लगी दिल को अब बहुतसमझो कि अब ये बाग़ भी मुरझाने वाला है
गरचे अहल-ए-शराब हैं हम लोगये न समझो ख़राब हैं हम लोग
हर एक बात ज़बाँ से कही नहीं जातीजो चुपके बैठे हैं कुछ उन की बात भी समझो
जब कश्ती साबित-ओ-सालिम थी साहिल की तमन्ना किस को थीअब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर साहिल की तमन्ना कौन करे
उतनी देर समेटूँ सारे दुख तेरेजितनी देर ऐ दोस्त बिखर नहीं जाता मैं
उस की हँसी तुम क्या समझोवो जो पहरों रोया है
शाइ'री झूट सही इश्क़ फ़साना ही सहीज़िंदा रहने के लिए कोई बहाना ही सही
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