aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sayed mohammad asar"
पहले सौ बार इधर उधर देखातब तुझे डर के इक नज़र देखा
दिन कटा जिस तरह कटा लेकिनरात कटती नज़र नहीं आती
तेरे आने का एहतिमाल रहामरते मरते भी ये ख़याल रहा
यार ग़ुस्सा तिरी बला खावेकाम निकले जो मुस्कुराने से
क्या कहूँ किस तरह से जीता हूँग़म को खाता हूँ आँसू पीता हूँ
बेवफ़ा कुछ नहीं तेरी तक़्सीरमुझ को मेरी वफ़ा ही रास नहीं
तू कहाँ मैं कहाँ प कहते हैंकि ये आपस में दोनों रहते हैं
जूँ अक्स कहाँ मिरा ठिकानातेरे जल्वे से जल्वा-गर हूँ
जिस घड़ी घूरते हो ग़ुस्सा सेनिकले पड़ता है प्यार आँखों में
काम तुझ से अभी तो साक़ी हैकि ज़रा हम को होश बाक़ी है
तू ही बेहतर है आइना हम सेहम तो इतने भी रू-शनास नहीं
यूँ ख़ुदा की ख़ुदाई बर-हक़ हैपर 'असर' की हमें तो आस नहीं
किन ने कहा और से न मिल तूपर हम से भी कभू मिला कर
जन्नत है उस बग़ैर जहन्नम से भी ज़ुबूँदोज़ख़ बहिश्त हैगी अगर यार साथ है
अब तेरी दाद न फ़रियाद किया करता हूँरात दिन चुपके पड़ा याद किया करता हूँ
रक़ीब देख सँभल कर के सामने आनाबरहना तेग़ हैं इक दस्त-ए-रोज़गार में हम
दर्द-ए-दिल छोड़ जाइए सो कहाँअपनी बाहर तो यहाँ गुज़र ही नहीं
अपने नज़दीक दर्द-ए-दिल मैं कहातेरे नज़दीक क़िस्सा-ख़्वानी की
आसूदगी कहाँ जो दिल-ए-ज़ार साथ हैमरने के ब'अद भी यही आज़ार साथ है
यूँ आग में से भाग निकलना नज़र बचाअपने तईं तो वज़्अ' न भाई शरार की
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