आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "shikast-e-rang"
शेर के संबंधित परिणाम "shikast-e-rang"
शेर
मिरी 'आशिक़ी सही बे-असर तिरी दिलबरी ने भी क्या किया
वही मैं रहा वही बे-दिली वही रंग-ए-लैल-ओ-नहार है
ए. डी. अज़हर
शेर
ये सब रंगीनियाँ ख़ून-ए-तमन्ना से इबारत हैं
शिकस्त-ए-दिल न होती तो शिकस्त-ए-ज़िंदगी होती
क़ाबिल अजमेरी
शेर
तर्क-ए-तअल्लुक़ात का कुछ उन को ग़म नहीं
हम तो शिकस्त-ए-अहद-ए-वफ़ा से मलूल हैं
मुहम्मद अय्यूब ज़ौक़ी
शेर
बहुत हसीन थी दुनिया बहुत ख़राब है ख़ल्क़
शिकस्त-ए-ख़्वाब से पहले शिकस्त-ए-ख़्वाब के बाद
मुईद रशीदी
शेर
शिकस्त-ए-साग़र-ए-दिल की सदाएँ सुन रहा हूँ मैं
ज़रा पूछो तो साक़ी से कि पैमानों पे क्या गुज़री
वहशी कानपुरी
शेर
कमर बाँधो मुक़द्दर के सहारे बैठने वालो
शिकस्त-ए-रज़्म से राहों का पेच-ओ-ख़म न बदलेगा
सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी
शेर
दीदनी है अब शिकस्त-ए-ज़ब्त की बे-चारगी
मुस्कुराता हूँ मगर दिल दर्द से लबरेज़ है
अकबर हैदरी कश्मीरी
शेर
तुम तो सुन पाए न आवाज़-ए-शिकस्त-ए-दिल भी
कुछ हमीं थे कि हरीफ़-ए-ग़म-ए-दुनिया भी हुए