aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "tahqiir"
मरहले यूँ तय किए तहक़ीर ने नामूस तकजैसे कच्ची ताक़ से इक रौशनी फ़ानूस तक
मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखाउस को छुट्टी न मिले जिस को सबक़ याद रहे
ऐ ताइर-ए-लाहूती उस रिज़्क़ से मौत अच्छीजिस रिज़्क़ से आती हो परवाज़ में कोताही
अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ सेये बात सच है मिरा बाप कम नहीं माँ से
तहरीर से वर्ना मिरी क्या हो नहीं सकताइक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता
जो तिरे इंतिज़ार में गुज़रेबस वही इंतिज़ार के दिन थे
दाद-ओ-तहसीन का ये शोर है क्यूँहम तो ख़ुद से कलाम कर रहे हैं
वरक़ वरक़ तुझे तहरीर करता रहता हूँमैं ज़िंदगी तिरी तशहीर करता रहता हूँ
शहर की इस भीड़ में चल तो रहा हूँज़ेहन में पर गाँव का नक़्शा रखा है
आँख रखते हो तो उस आँख की तहरीर पढ़ोमुँह से इक़रार न करना तो है आदत उस की
तदबीर से क़िस्मत की बुराई नहीं जातीबिगड़ी हुई तक़दीर बनाई नहीं जाती
तदबीर मेरे इश्क़ की क्या फ़ाएदा तबीबअब जान ही के साथ ये आज़ार जाएगा
ऐ गर्दिशो तुम्हें ज़रा ताख़ीर हो गईअब मेरा इंतिज़ार करो मैं नशे में हूँ
फ़क़त तुम ही नहीं नाराज़ मुझ से जान-ए-जानाँमिरे अंदर का इंसाँ तक ख़फ़ा है इंतिहा है
ख़ुश्बू जैसी रात ने मेराअपने जैसा हाल किया था
अपनी तंहाई को आबाद तो कर सकते हैंहम तुझे मिल न सकें याद तो कर सकते हैं
बहुत ताख़ीर से पाया है ख़ुद कोमैं अपने सब्र का फल हो गई हूँ
कौन तहलील हुआ है मुझ मेंमुंतशिर क्यूँ हैं अनासिर मेरे
उम्र भर लिखते रहे फिर भी वरक़ सादा रहाजाने क्या लफ़्ज़ थे जो हम से न तहरीर हुए
पा-ब-गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौनदस्त-बस्ता शहर में खोले मिरी ज़ंजीर कौन
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books