aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "talna"
टलना था मेरे पास से ऐ काहिली तुझेकम-बख़्त तू तो आ के यहीं ढेर हो गई
तिरी दुआएँ भी शामिल हैं कोशिशों में मिरीमुसीबतों का न टलना अजीब लगता है
एक लम्हे में बिखर जाता है ताना-बानाऔर फिर उम्र गुज़र जाती है यकजाई में
बड़े ताबाँ बड़े रौशन सितारे टूट जाते हैंसहर की राह तकना ता सहर आसाँ नहीं होता
यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दियारात भर ताला'-ए-बेदार ने सोने न दिया
आली शेर हो या अफ़्साना या चाहत का ताना बानालुत्फ़ अधूरा रह जाता है पूरी बात बता देने से
किसी के ध्यान में डूबा हुआ दिलबहाने से मुझे भी टालता है
पूरी आवाज़ से इक रोज़ पुकारूँ तुझ कोऔर फिर मेरी ज़बाँ पर तिरा ताला लग जाए
दिल से शौक़-ए-रुख़-ए-निकू न गयाझाँकना-ताकना कभू न गया
ये कह के मेरे सामने टाला रक़ीब कोमुझ से कभी की जान न पहचान जाइए
तअ'ना-ए-नश्शा न दो सब को कि कुछ सोख़्ता-जाँशिद्दत-ए-तिश्ना-लबी से भी बहक जाते हैं
मेरी ख़ामोशी पे थे जो तअना-ज़नशोर में अपने ही बहरे हो गए
दस्तक देने वाले तुझ को इल्म नहींदरवाज़े के दोनों जानिब ताला है
ज़ोफ़ में तअना-ए-अग़्यार का शिकवा क्या हैबात कुछ सर तो नहीं है कि उठा भी न सकूँ
रहे सीना तना लंगर से उस केये चोटी इस लिए पीछे पड़ी है
ता'ना देते हो मुझे जीने काज़िंदगी मेरी ख़ता हो जैसे
आ ही कूदा था दैर में वाइ'ज़हम ने टाला ख़ुदा ख़ुदा कर के
हाँ अहल-ए-तलब कौन सुने ताना-ए-ना-याफ़्तदेखा कि वो मिलता नहीं अपने ही को खो आए
मेरी फ़िक्र की ख़ुशबू क़ैद हो नहीं सकतीयूँ तो मेरे होंटों पर मस्लहत का ताला है
तिरे जवाहिर-ए-तरफ़-ए-कुलह को क्या देखेंहम औज-ए-ताला-ए-लाला-ओ-गुहर को देखते हैं
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