aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "zaidii"
इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओमिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है
मिरी रूह की हक़ीक़त मिरे आँसुओं से पूछोमिरा मज्लिसी तबस्सुम मिरा तर्जुमाँ नहीं है
आँधी चली तो नक़्श-ए-कफ़-ए-पा नहीं मिलादिल जिस से मिल गया वो दोबारा नहीं मिला
मुड़ के देखा तो हमें छोड़ के जाती थी हयातहम ने जाना था कोई बोझ गिरा है सर से
दे हौसले की दाद के हम तेरे ग़म में आजबैठे हैं महफ़िलों को सजाए तिरे बग़ैर
मत पूछ कि हम ज़ब्त की किस राह से गुज़रेये देख कि तुझ पर कोई इल्ज़ाम न आया
दिल के रिश्ते अजीब रिश्ते हैंसाँस लेने से टूट जाते हैं
मैं किस के हाथ पे अपना लहू तलाश करूँतमाम शहर ने पहने हुए हैं दस्ताने
इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाएजिस का हम-साए के आँगन में भी साया जाए
इस तरह होश गँवाना भी कोई बात नहींऔर यूँ होश से रहने में भी नादानी है
इश्क़ इन ज़ालिमों की दुनिया मेंकितनी मज़लूम ज़ात है ऐ दिल
ये दुश्मनी है साक़ी या दोस्ती है साक़ीऔरों को जाम देना मुझ को दिखा दिखा के
यूँ तो वो हर किसी से मिलती हैहम से अपनी ख़ुशी से मिलती है
मैं बे-हुनर था मगर सोहबत-ए-हुनर में रहाशुऊ'र बख़्शा हमा-रंग महफ़िलों ने मुझे
हाँ ये ख़ता हुई थी कि हम उठ के चल दिएतुम ने भी तो पलट के पुकारा नहीं हमें
जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन न थावो हौसले ज़माने के मेयार हो गए
जैसे दो मुल्कों को इक सरहद अलग करती हुईवक़्त ने ख़त ऐसा खींचा मेरे उस के दरमियाँ
लज़्ज़त-ए-दर्द मिली इशरत-ए-एहसास मिलीकौन कहता है हम उस बज़्म से नाकाम आए
बिछड़ने वालों में हम जिस से आश्ना कम थेन जाने दिल ने उसे याद क्यूँ ज़ियादा किया
ग़म-ए-दौराँ ने भी सीखे ग़म-ए-जानाँ के चलनवही सोची हुई चालें वही बे-साख़्ता-पन
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