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शेर
इब्न-ए-इंशा
शेर
मेरे नाले के न क्यूँ हो चर्ख़-ए-अख़्ज़र ज़ेर-ए-पा
ख़ुत्बा ख़्वान-ए-इश्क़ है रखता है मिम्बर ज़ेर-ए-पा
शाह नसीर
शेर
आग़ाज़ लफ़्ज़-ए-कुन है तो अंजाम नफ़्ख़-ए-सूर
दुनिया की ज़ेब-ओ-ज़ीनत-ओ-जाह-ओ-जलाल क्या
एहतरामुलहक़ सिद्दीक़ी शरर
शेर
बस-कि हूँ 'ग़ालिब' असीरी में भी आतिश ज़ेर-ए-पा
मू-ए-आतिश दीदा है हल्क़ा मिरी ज़ंजीर का
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
चमक शायद अभी गीती के ज़र्रों की नहीं देखी
सितारे मुस्कुराते क्यूँ हैं ज़ेब-ए-आसमाँ हो कर
सिराज लखनवी
शेर
मुहताज-ए-ज़ेब-ए-आरियती कब है ज़ात-ए-बह्त
अल्लाह का क़दीम से है नाम बे-नुक़त
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
शेर
'बर्क़' उफ़्तादा वो हूँ सल्तनत-ए-आलम में
ताज-ए-सर इज्ज़ से नक़्श-ए-कफ़-ए-पा होता है
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
शेर
फ़साने यूँ तो मोहब्बत के सच हैं पर कुछ कुछ
बढ़ा भी देते हैं हम ज़ेब-ए-दास्ताँ के लिए
मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता
शेर
बे-समर पेड़ों को चूमेंगे सबा के सब्ज़ लब
देख लेना ये ख़िज़ाँ बे-दस्त-ओ-पा रह जाएगी
अमजद इस्लाम अमजद
शेर
ख़याल-ए-नाफ़ में ज़ुल्फ़ों ने मुश्कीं बाँध दीं मेरी
शनावर किस तरह गिर्दाब से बे-दस्त-ओ-पा निकले