aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ",ASKo"
उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआअब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
असर उस को ज़रा नहीं होतारंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता
नुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बनेक्या बने बात जहाँ बात बनाए न बने
दिल जो है आग लगा दूँ उस कोऔर फिर ख़ुद ही हवा दूँ उस को
जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम नेइस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने
उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहींइश्क़ ही इश्क़ की क़ीमत हो ज़रूरी तो नहीं
मत बुरा उस को कहो गरचे वो अच्छा भी नहींवो न होता तो ग़ज़ल मैं कभी कहता भी नहीं
दिया है दिल अगर उस को बशर है क्या कहिएहुआ रक़ीब तो हो नामा-बर है क्या कहिए
की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैंहोती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं
वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस कोकि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
वो मिरे पास है क्या पास बुलाऊँ उस कोदिल में रहता है कहाँ ढूँडने जाऊँ उस को
मिसाल इस की कहाँ है कोई ज़माने मेंकि सारे खोने के ग़म पाए हम ने पाने में
उस को न ख़याल आए तो हम मुँह से कहें क्यावो भी तो मिले हम से हमीं उस से मिलें क्या
जो हो सका न मिरा उस को भूल जाऊँ मैंपराई आग में क्यूँ उँगलियाँ जलाऊँ मैं
उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी हैजो हुआ वो न हुआ होता ये ग़म बाक़ी है
बस एक बात की उस को ख़बर ज़रूरी हैकि वो हमारे लिए किस क़दर ज़रूरी है
बग़ैर उस को बताए निभाना पड़ता हैये 'इश्क़ राज़ है इस को छुपाना पड़ता है
वो बेवफ़ा ही सही उस को बेवफ़ा न कहोअदब की हद में रहो हुस्न को बुरा न कहो
उस को शायद बुरी लगे सिगरेटमत जला उस के सामने सिगरेट
हज़ारों तरह अपना दर्द हम उस को सुनाते हैंमगर तस्वीर को हर हाल में तस्वीर पाते हैं
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