आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",VAMK"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम ",vamK"
ग़ज़ल
ये माना हुस्न की फ़ितरत बहुत नाज़ुक है ऐ 'वामिक़'
मिज़ाज-ए-इश्क़ की लेकिन नज़ाकत और होती है
वामिक़ जौनपुरी
ग़ज़ल
आमिर अमीर
ग़ज़ल
फ़रहाद ओ क़ैस ओ वामिक़ ओ अज़रा थे चार दोस्त
अब हम भी आ मिले तो हुए मिल के चार पाँच
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
निगाह-ए-चश्म-ए-हासिद वाम ले ऐ ज़ौक़-ए-ख़ुद-बीनी
तमाशाई हूँ वहदत-ख़ाना-ए-आईना-ए-दिल का
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले
'ग़ालिब' ये ख़ौफ़ है कि कहाँ से अदा करूँ
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
कैसी अज़रा कैसी लैला कैसा वामिक़ कैसा मजनूँ
अब मशहूर जहाँ में क्या क्या मैं ही मैं हूँ तू ही तू है
नूह नारवी
ग़ज़ल
हम उन की ज़ुल्फ़ से सौदा जो वाम लेते हैं
तो अस्ल ओ सूद वो सब दाम दाम लेते हैं
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
देख कर अहल-ए-क़लम को कुश्ता-ए-आसूदगी
ख़ुद को 'वामिक़' फ़र्ज़ इक नक़्क़ाद कर लेते हैं हम