आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",al9e"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम ",al9e"
ग़ज़ल
मय-कदा सुनसान ख़ुम उल्टे पड़े हैं जाम चूर
सर-निगूँ बैठा है साक़ी जो तिरी महफ़िल में है
बिस्मिल अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
आले रज़ा रज़ा
ग़ज़ल
ता-साफ़ करे दिल न मय-ए-साफ़ से सूफ़ी
कुछ सूद-ओ-सफ़ा इल्म-ए-तसव्वुफ़ नहीं करता
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
उल्टे वो शिकवे करते हैं और किस अदा के साथ
बे-ताक़ती के ताने हैं उज़्र-ए-जफ़ा के साथ
मोमिन ख़ाँ मोमिन
ग़ज़ल
इतना जुनून-ए-शौक़ दिया क्यूँ ख़ौफ़ जो था रुस्वाई का
बात करो ख़ुद क़ाबिल-ए-शिकवा उल्टे मुझ को रहने दो
आरज़ू लखनवी
ग़ज़ल
आज से पहले तिरे मस्तों की ये ख़्वारी न थी
मय बड़ी इफ़रात से थी फिर भी सरशारी न थी