आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "امن"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "امن"
ग़ज़ल
है तुर्फ़ा अम्न-गाह निहाँ-ख़ाना-ए-अदम
आँखों के रू-ब-रू से तू लोगों के टल के चल
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
फ़रेब-ए-अम्न में कुछ मस्लहत तो है वर्ना
सुकून-ए-कश्ती ओ तौफ़ीक़-ए-ना-ख़ुदा मा'लूम