aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "بام_مینا"
बाम-ए-मीना से माहताब उतरेदस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए
दम-ब-दम मेरा तरफ़-दार हुआ करता थाये जो दुश्मन है कभी यार हुआ करता था
जो बात मुँह से निकालें तो जुर्म है अपनालहू को राग बना लें तो जुर्म है अपना
मेहंदी था मेरा ख़ून कि होता जो राएगाँइक शब के ब'अद हाथ से क़ातिल के छूट कर
दिल चीज़ क्या है आप मिरी जान लीजिएबस एक बार मेरा कहा मान लीजिए
लब पे आती नहीं है दिल की बातमेरा मतलब अदा करे कोई
सुना हर बार मेरा कलमा-ए-सिदक़मगर हर बार झुठलाया गया हूँ
यूँ खुले सर न घर से निकला करदेख बूढ़ों की बात माना कर
तुम ने उत्तर बदल दिए हर बारमेरा वो ही सवाल है अब भी
मेहरबाँ तुम जो थे तो गर्दिश-ए-चर्ख़बाल मेरा न कर सकी बीका
इस बार मैं 'अजीब सी गहराइयों में थाइस बार मेरा पार उतरना मुहाल था
पलकें उठा के देख सका मैं न एक बारमेरा ख़िरद जुनूँ का निगहबान सा रहा
तिरे बहिश्त से गुज़रा तो याद आया मुझेइसी तरह का कहीं एक बाग़ मेरा भी था
उतरे नहीं चमन में मिरी चाहतों के फूलदिल का ये बाग़ मेरा बयाबान हो गया
तुम ने रक्खा है बहुत मेरा ख़यालऐ सबीना और नताशा शुक्रिया
चंद घड़ियों के बाद मिलना थावक़्त ने क्या ड्रॉप सीन किया
बाम पर यार का चेहरा देखातूर पर नूर का शोअ'ला देखा
वो बार बार मेरा लिपटना शब-ए-विसालउन का झिजक के कहना कोई देखता न हो
ऐसी कसक थी आँख से आँसू गिरा न थाइस बार मेरा दर्द भी मेरी दवा न था
कह रही थी दोस्त से 'राहिल' मिलेगा एक दिनबाप मेरा इस क़बीले का अभी सरदार है
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books