आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "بزم_ساقی"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "بزم_ساقی"
ग़ज़ल
मय-कदे में क्या तकल्लुफ़ मय-कशी में क्या हिजाब
बज़्म-ए-साक़ी में अदब आदाब मत देखा करो
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
किसी दिन बज़्म-ए-साक़ी से निकाले जाओगे 'क़ैसर'
निभाओगे कहाँ तक ठाठ ये शाहाना रोज़ाना
क़ैसर-उल जाफ़री
ग़ज़ल
ख़ुश्क होंटों के सहारे मुझ को पहचाना गया
बज़्म-ए-साक़ी में हुजूम-ए-तिश्नगाँ होते हुए
नाज़िर सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
बज़्म-ए-साक़ी की मुझे रोज़ ख़बर मिलती है
दिल मिरा कहता है गर्दिश में वहाँ जाम आया
सय्यद अहमद हुसैन शफ़ीक़ लखनवी
ग़ज़ल
बज़्म-ए-साक़ी भी वो बाज़ार-ए-तरब है 'वाहिद'
एक साग़र पे जहाँ फ़ितरत-ए-ख़ुद्दार बिके
वाहिद प्रेमी
ग़ज़ल
अजब तिलिस्म का आलम है बज़्म-ए-साक़ी में
न बे-ख़बर हूँ मैं ख़ुद से न होशियार हूँ मैं
शिवराज बहार
ग़ज़ल
यही तो 'शौक़'-ए-मजबूरी है अपनी बज़्म-ए-साक़ी में
हज़ार इंकार करते हैं मगर जाना ही पड़ता है