aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "تراشنا"
तिरी सदा से तुझी को तराशना होगाहवा की चाप से शक्लें उभारना होंगी
मुझे तो अपने लिए रास्ता तराशना हैमैं क्या करूँगा किसी का लिखा हुआ लिख कर
मुबहम तख़य्युलात के पैकर तराशनाहै मश्ग़ला ख़लाओं में मंज़र तराशना
वो बुलाएँ तो क्या तमाशा होहम न जाएँ तो क्या तमाशा हो
आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसेऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे
अ'र्ज़-ए-अलम ब-तर्ज़-ए-तमाशा भी चाहिएदुनिया को हाल ही नहीं हुलिया भी चाहिए
उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदनदेखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं
किस रोज़ तोहमतें न तराशा किए अदूकिस दिन हमारे सर पे न आरे चला किए
वो भी क्या लोग हैं 'मोहसिन' जो वफ़ा की ख़ातिरख़ुद-तराशीदा उसूलों पे भी अड़ जाते हैं
ज़ाहिर की आँख से न तमाशा करे कोईहो देखना तो दीदा-ए-दिल वा करे कोई
ख़ुद तराशा है जब से बुत अपनाबुत-परस्ती से इश्क़ हो गया है
हर तरफ़ यार का तमाशा हैउस के दीदार का तमाशा है
तराश कर मिरे बाज़ू उड़ान छोड़ गयाहवा के पास बरहना कमान छोड़ गया
तिरी गली में तमाशा किए ज़माना हुआफिर इस के बा'द न आना हुआ न जाना हुआ
ख़त के छोटे से तराशे में नहीं आएँगेग़म ज़ियादा हैं लिफ़ाफ़े में नहीं आएँगे
जो ग़ज़ल आज तिरे हिज्र में लिक्खी है वो कलक्या ख़बर अहल-ए-मोहब्बत का तराना बन जाए
तमाशा अपना सर-ए-रह-गुज़र बनाया जाएजो राहज़न है उसे राहबर बनाया जाए
हमारा क्या है जो होता है जी उदास बहुततो गुल तराशते हैं तितलियाँ बनाते हैं
गला सुराही नवा गीत सोज़ आह असरतरंग चीख़ तरन्नुम तराना सुर की लड़ी
बिखर जाएँगे हम क्या जब तमाशा ख़त्म होगामिरे मा'बूद आख़िर कब तमाशा ख़त्म होगा
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