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ग़ज़ल
फ़ासले हैं भी और नहीं भी नापा तौला कुछ भी नहीं
लोग ब-ज़िद रहते हैं फिर भी रिश्तों की पैमाइश पर
गुलज़ार
ग़ज़ल
जो हाथ आए 'ज़फ़र' ख़ाक-पा-ए-'फ़ख़रूद्दीन'
तो मैं रखूँ उसे आँखों के तूतिया के लिए
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
पल में तोला पल में माशा पल में सब दरहम बरहम
ज़र्रा-ए-ख़ाकी नज़रें मिलाए बैठे हैं सय्यारों से
वामिक़ जौनपुरी
ग़ज़ल
जो सुर्मा दूँ हूँ तो इक तूतिया सा बाँधे है
कहूँ जो बात बनाए हिकायतें क्या क्या
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
बशीरुद्दीन अहमद देहलवी
ग़ज़ल
गो मा-वारा-ए-वक़्त भी है मुझ में एक चीज़
मीज़ान-ए-सुब्ह-ओ-शाम में तौला गया हूँ मैं