आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "سربراہی"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "سربراہی"
ग़ज़ल
न अश्कों का अक़ीदा है न आहों की इबादत है
बे-वारिस दर्द हैं मेरे तू अपनी सरबराही दे
सागर हुज़ूरपूरी
ग़ज़ल
मैं भला ठंडी हवा से क्या उलझता चुप रहा
फूल की ख़ुश-बू बहुत थी सरगिरानी के लिए
सज्जाद बाक़र रिज़वी
ग़ज़ल
इस फ़ज़ा में सरसराती हैं हज़ारों बिजलियाँ
इस फ़ज़ा में कैसी कैसी सूरतें सँवला गईं