आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "तक़ी"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "तक़ी"
ग़ज़ल
लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश को बाले तक
उस को फ़लक चश्म-ए-मह-ओ-ख़ुर की पुतली का तारा जाने है
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "तक़ी"
लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश को बाले तक
उस को फ़लक चश्म-ए-मह-ओ-ख़ुर की पुतली का तारा जाने है
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here