aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम " .rrr"
मेरे अतराफ़ ये ज़ंजीर-ए-अलाएक़ कैसीज़िंदगी जुर्म सही क़ाबिल-ए-ताज़ीर नहीं
वो तो हश्र था मगर उस की अब वो शबाहतें भी चली गईंजो रहें तो शहर में क्या रहें कि क़यामतें भी चली गईं
तुझ से बिछड़े भी तो हालात ने रोने न दियादिल-शिकन वक़्त के लम्हात ने रोने न दिया
पूछोगे तो खुल जाएगी ज़ख़्मों की ज़बाँ औरपुरशिश तो गुज़रती है ग़म-ए-दिल पे गिराँ और
दोस्त बन कर आए कोई और गले हँस कर लगेएक 'अर्सा हो गया है पीठ में ख़ंजर लगे
ये हादिसा है मगर उस तरफ़ हुआ भी नहींजुदा हुआ भी तो उस से जो जानता भी नहीं
जो चाहिए था वो न मिला आसमान सेठुकरा के लौट आए सितारों को शान से
नए अंदाज़ से दीदार कर लूँ फिर चले जानामैं अपनी रूह को बेदार कर लूँ फिर चले जाना
कभी डराए कभी ख़ुद ही डरने लगती हैहयात हरकत-ए-अतफ़ाल करने लगती है
इस से पहले कि सहारों को तू आदत कर लेदिल बग़ैर उस के सँभलने की भी हिम्मत कर ले
अजनबी रहगुज़र के थे ही नहींहम जिधर थे उधर के थे ही नहीं
मैं शाइ'र हूँ तो क्या रोता रहूँगालहू के दाग़ ही धोता रहूँगा
फिर इस के बाद तो सात आसमाँ उदास रहेवो चाहता था मेरा साएबाँ उदास रहे
कट गए हम तो हबीबों से इजाज़त ले करहम से मिलता है रक़ीबों से इजाज़त ले कर
दिन महीना साल बेहतर हो गयारफ़्ता रफ़्ता हाल बेहतर हो गया
गुलों को चूम कर आई सबा सी लगती थीथी इक नज़र पे मोअ'त्तर हवा सी लगती थी
माह कितने हैं साल कितने हैंहिज्र कितने विसाल कितने हैं
तुझ को देखा तो मिरी आँख ने देखा मुझ मेंझिलमिलाता है कोई पहले ही तुझ सा मुझ में
बुझा चुकी है हवा जिस को वो दिया भी मैंमगर ये देख बहुत देर तक जला भी मैं
आगे तुम हो तो जफ़ाओं का क़लक़ याद नहींदिल वो बच्चा है जिसे पहला सबक़ याद नहीं
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books