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ग़ज़ल
बशीर बद्र
ग़ज़ल
मुझे गुफ़्तुगू से बढ़ कर ग़म-ए-इज़्न-ए-गुफ़्तुगू है
वही बात पूछते हैं जो न कह सकूँ दोबारा
शकील बदायूनी
ग़ज़ल
ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
फिर वो परवाने जिन्हें इज़्न-ए-शहादत न मिला
फिर वो शमएँ कि जिन्हें रात न होने पाई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
सर-ए-तस्लीम है ख़म इज़्न-ए-उक़ूबत के बग़ैर
हम तो सरकार के मद्दाह हैं ख़िलअत के बग़ैर
इरफ़ान सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
मु'आफ़ कर मिरी मस्ती ख़ुदा-ए-अज़्ज़ा-व-जल
कि मेरे हाथ में साग़र है मेरे लब पे ग़ज़ल
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
वो अपने अपने तमाम साथी, तमाम महबूब ले के आएँ
तो मेरे हाथों में हाथ दे दे हमें भी इज़्न-ए-मुबाहला है
फ़रीहा नक़वी
ग़ज़ल
बशीर बद्र
ग़ज़ल
ये दश्त-ए-तर्क-ए-मोहब्बत ये तेरे क़ुर्ब की प्यास
जो इज़्न हो तो तिरी याद से गुज़र जाऊँ