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ग़ज़ल
अब्बास ताबिश
ग़ज़ल
दिल बेताब-ए-मर्ग-ए-ना-गहाँ बाक़ी न रह जाए
मोहब्बत का ये नाज़ुक इम्तिहाँ बाक़ी न रह जाए
मुशीर झंझान्वी
ग़ज़ल
प्रेम लाल शिफ़ा देहलवी
ग़ज़ल
किस ख़ता पर ये उठाना पड़ी रातों की सलीब
हम ने देखा था अभी ख़्वाब-ए-सहर ही कितना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
आले रज़ा रज़ा
ग़ज़ल
ता-ब-कय शौकत-ए-अज्दाद पे ये नाज़-ओ-ग़ुरूर
ख़्वाब-ए-ग़फ़लत से उठो वक़्त के तेवर देखो
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
आले रज़ा रज़ा
ग़ज़ल
दमक उठी है फ़ज़ा माहताब-ए-ख़्वाब के साथ
धड़क रहा है ये दिल किस रबाब-ए-ख़्वाब के साथ
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
अभी महल के दर-ओ-बाम ना-मुकम्मल हैं
ये किस ने ख़्वाब से आ कर जगा दिया मुझ को