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ग़ज़ल
अर्शी भोपाली
ग़ज़ल
इधर सबा ने ख़बर दी आ कर कि आज अब्र-ए-बहार आया
उधर गरेबाँ सिए हुए मैं चमन में दीवाना-वार आया
अब्दुर्रशीद कैफ़ी
ग़ज़ल
उधर सबा ने ख़बर दी आ कर कि आज अब्र-ए-बहार आया
इधर गरेबाँ सिए हुए मैं चमन में दीवाना-वार आया
अब्दुर्रशीद ख़ान कैफ़ी महकारी
ग़ज़ल
ज़िंदगी के दश्त में आया न जब अक्स-ए-बहार
मैं ने ख़ुद को ख़ुद दिखाया वहशतों का सिलसिला