aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "amn"
सब से पुर-अम्न वाक़िआ' ये हैआदमी आदमी को भूल गया
वो क्यूँ कहेंगे कि दोनों में अम्न हो जाएहमारी जंग से जिन की कमाई जारी है
अब वो दुनिया अजीब लगती हैजिस में अम्न-ओ-अमान बाक़ी है
सुर्ख़ियाँ अम्न की तल्क़ीन में मसरूफ़ रहींहर्फ़ बारूद उगलते रहे अख़बार के बीच
नई ज़मीं न कोई आसमान माँगते हैंबस एक गोशा-ए-अम्न-ओ-अमान माँगते हैं
ये ग़ोल-वश हैं इन को समझ तू न रहनुमासाए से बच के अहल-ए-फ़रेब-व-दग़ल के चल
बाइस-ए-अम्न-ओ-मोहब्बत है अगर मेरा लहूक़तरा क़तरा ब-ख़ुदा दे के चला जाऊँगा
नवेद-ए-अम्न है बेदाद-ए-दोस्त जाँ के लिएरही न तर्ज़-ए-सितम कोई आसमाँ के लिए
कुछ उन के रहम पे थी यूँ ही ज़िंदगी मौक़ूफ़कि उन को राज़-ए-मोहब्बत भी हो गया मा'लूम
ख़्वाहिशें नहीं मरतीं ख़्वाहिशें दबाने सेअम्न हो नहीं सकता गोलियाँ चलाने से
हमेशा अम्न नहीं होता फ़ाख़्ताओं मेंकभी-कभार उक़ाबों से भी कलाम करो
लहराते हुए आए थे वो अम्न का परचमपरचम को उठाए हुए नेज़े की अनी थी
अम्न के परिंदों की सरहदें नहीं होतींहम जहाँ ठहर जाएँ वो वतन हमारा है
मैं इक ज़मीन हूँ अमन-ओ-अम्मां की मुतलाशीमिरे अज़ीज़ मुझे कर्बला बनाते हैं
रहते हैं जमा कूचा-ए-जानाँ में ख़ास ओ आमआबाद एक घर है जहान-ए-ख़राब में
फ़ितरतन हर आदमी है तालिब-ए-अम्न-ओ-अमाँदुश्मनों को भी मोहब्बत की नज़र से देखिए
हमारे शहर में सब ख़ैर-ओ-आफ़ियत है मगरयही कमी है कि अम्न-ओ-अमान कुछ कम है
अम्न था प्यार था मोहब्बत थारंग था नूर था नवा था फ़िराक़
एक मक़्सद के लिए अम्न की तहरीरों मेंख़ून से लिक्खे हुए बाब दिखाते हैं तुम्हें
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