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ग़ज़ल
क्या बहार-ए-नक़्श-ए-पा है ऐ नियाज़-ए-आशिक़ी
लुत्फ़ सर रखने में क्या सर रख के मर जाने में है
असग़र गोंडवी
ग़ज़ल
दिल में है क्या जानिए किस का ख़याल-ए-नक़्श-ए-पा
लग गईं आँखें ज़मीं से जो मिसाल-ए-नक़्श-ए-पा
शाह नसीर
ग़ज़ल
नई मंज़िलों को पा लो मिरे नक़्श-ए-पा पे चल के
मैं बना चुकी हूँ लोगो वो जो रास्ते हैं कल के
शायरा वहीद
ग़ज़ल
ओसामा ख़ालिद
ग़ज़ल
खींचती है क्यों हवा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा की तरफ़
क्या गए हैं हम से पहले लोग सहरा की तरफ़
सुहैल अहमद फ़ारूक़ी
ग़ज़ल
न पाया खोज बरसों नक़्श-ए-पा-ए-रफ़्तगाँ ढूँढे
न हो मुमकिन पता जिन का उन्हें कोई कहाँ ढूँढे
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
ये समझ के चलती हूँ तेरा नक़्श-ए-पा होगा
मैं जहाँ से गुज़रूँगी तेरा सामना होगा
मुज़फ़्फ़रुन्निसा नाज़
ग़ज़ल
हैं सौ तरह के रंग हर इक नक़्श-ए-पा में देख
इंसाँ का हुस्न आइना-ए-इर्तिक़ा में देख
अकबर हैदराबादी
ग़ज़ल
आँखों को नक़्श-ए-पा तिरा दिल को ग़ुबार कर दिया
हम ने विदा-ए-यार को अपना हिसार कर दिया