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ग़ज़ल
निगाह-ए-दोस्त के आगे सिपर लाना है ला-हासिल
ये तीर-ए-नीम-कश क़ल्ब ओ जिगर बर्मा ही जाता है
कौसर नियाज़ी
ग़ज़ल
नासिर काज़मी
ग़ज़ल
बीता दीद उम्मीद का मौसम ख़ाक उड़ती है आँखों में
कब भेजोगे दर्द का बादल कब बरखा बरसाओगे