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ग़ज़ल
तारे बरसाएँ अंगारे किरनें तीर चलाती हैं
नागिन बन कर डस लेती है दिल को रात जुदाई की
तुफ़ैल होशियारपुरी
ग़ज़ल
बरसाएँ 'ज़ुहैर' अहल-ए-जहाँ संग तो क्या है
मैं काँच का प्याला हूँ न मिट्टी का घड़ा हूँ
ज़ुहैर कंजाही
ग़ज़ल
उम्मीद-ब-दिल रिंदान-ए-तलब हाथों में पियाला थामे हैं
मयख़ाने में उन के मर जाएँ वो आँख से मय बरसाएँ तो
सूफ़िया दीपीका कौसर
ग़ज़ल
शुऊ'र-ओ-फ़न जिसे छू कर फ़ज़ा में नूर बरसाएँ
इक ऐसी शय भी हम मफ़्हूम के दफ़्तर में रख देंगे
ज़हीर ग़ाज़ीपुरी
ग़ज़ल
वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं
दिल-ए-बे-ख़बर मिरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा