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ग़ज़ल
उन्हीं नाज़ुक लबों को फ़ुर्सत-ए-आतिश-बयानी भी
उन्हीं नाज़ुक लबों को फूल बरसाना भी आता है
रज़ा जौनपुरी
ग़ज़ल
मोमिन ख़ाँ मोमिन
ग़ज़ल
दिल की बातें नहीं है तो दिलचस्प ही कुछ बातें हों
ज़िंदा रहना है तो दिल को बहलाना तो होगा