आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "bikte"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "bikte"
ग़ज़ल
जान-ओ-दिल नज़्र हैं लेकिन निगाह-ए-लुत्फ़ की नज़्र
मुफ़्त बिकते हैं क़यामत भी गिराँ रखते हैं
सय्यद ज़मीर जाफ़री
ग़ज़ल
बिकने पर जब आ ही गए थे ऊँचे मोल तो बिकते हम
हम को हमारे रहबर लेकिन अर्ज़ां बेच के आए हैं
नवाज़ देवबंदी
ग़ज़ल
शहर-ए-सुख़न का तर्ज़-ए-तिजारत 'अजीब है
बिकते हैं फ़िक्र-ओ-फ़न भी तो मिट्टी के भाव पर
इशरत किरतपुरी
ग़ज़ल
बिकते हैं शहर में गुल-ए-बे-ख़ार हर तरफ़
है बाग़बाँ की गर्मी-ए-बाज़ार हर तरफ़
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
ग़ज़ल
बातों बातों में जो हम ने दर्द दिल का भी कहा
सुन के बोला तू ने ये क्या बकते बिकते कह दिया
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
बिकते हैं तेरे नाम से हम ऐ कमंद-ए-ज़ुल्फ़
तुझ को भी छोड़ दीजिए तो किस के कहाइए