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ग़ज़ल
हज़ारों सर-फिरे सर आब-ए-सालन पर उठाते हैं
कभी तूफ़ान की ज़द में भी कोई बिलबिला ठहरे
जहूर बिस्वानी
ग़ज़ल
वही है नदी वही नहर है वही मौज है वही लहर है
ये हबाब है वही बुलबुला तुम्हें याद हो कि न याद हो
इस्माइल मेरठी
ग़ज़ल
नूह नारवी
ग़ज़ल
ये छपके का जो बाला कान में अब तुम ने डाला है
इसी बाले की दौलत से तुम्हारा बोल-बाला है