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ग़ज़ल
होनहार बिरवा के पत्ते चिकने चिकने होते हैं
बहुत नहीं कुछ थोड़े ही दिन में बेल फुनग को आलेगी
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
चंदा के उजयारे रथ में जाने पी कब आएँगे
बिर्हा के अँधियारे पथ पर नैन बिछाए बैठे हैं
तुफ़ैल होशियारपुरी
ग़ज़ल
बिरहा का गीत हूँ मज़लूम की आवाज़ हूँ मैं
तुम जो चाहो तो हसीं नग़्मा बना लो मुझ को
पयाम फ़तेहपुरी
ग़ज़ल
जिस दिन उन से मिलन हुआ था जीवन में रस बरसा
अब बिर्हा ने जीवन रस में ज़हर दिया है घोल
चमन लाल चमन
ग़ज़ल
बिर्हा और संजोग कथा हैं माया-जाल की चंचलता हैं
वर्ना प्रेमी मन बंधन में इक दूजे से कब छोटे हैं
तुफ़ैल दारा
ग़ज़ल
तुम जो नहीं तो अपने लिए हैं रैन और दिन सब एक समान
ब्योग की अंधी अंधी रातें बिर्हा की काली काली धूप
सुलताना मेहर
ग़ज़ल
मीठी नींद में डूबे गाँव बुझ गए सारे दीप
बिर्हा के मारों का सुख के सपनों से क्या काम