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ग़ज़ल
बुरा नहीं बड़ा नाज़ुक मिज़ाज है मिरा दोस्त
ज़र्रा सा टोक दिया क्या कि में ब्लाक हुआ
तस्लीम नियाज़ी
ग़ज़ल
दिल सी चेक-बुक है तिरे पास तुझे क्या धड़का
जी को भा जाए तो फिर चीज़ की क़ीमत पे न जा