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ग़ज़ल
अदू-ए-ख़ीरा-सराब हो गया बड़ा ख़ुर्रांट
यही है दिल में कि दें आज उस को हम इक डाँट
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
ग़ज़ल
वक़्त होंटों से मिरे वो भी खुरच कर ले गया
इक तबस्सुम जो था दुनिया को दिखाने के लिए
ज़फ़र गोरखपुरी
ग़ज़ल
रंग-ए-ख़ूबान-ए-जहाँ देखते ही ज़र्द किया
आप ज़ोर आँखों में तस्वीर लिए फिरते हैं