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ग़ज़ल
इक बार मोहब्बत में ये दिल जो टूट गया सो टूट गया
माला में पिरोया सौ मोती जो छूट गया सो छूट गया
देवदास बिस्मिल
ग़ज़ल
डरता हूँ कहीं ऐ दोस्त मिरे ये प्यार मिरा बदनाम न हो
जिस तरह से टूटे लाखों दिल अपना भी वही अंजाम न हो
देवदास बिस्मिल
ग़ज़ल
जब जब तेरी आँख से टपका आँसू शबनम रोई है
जैसे शम्अ' जली है शब भर थक के सुब्ह को सोई है