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ग़ज़ल
उस सम्त वहशी ख़्वाहिशों की ज़द में पैमान-ए-वफ़ा
उस सम्त लहरों की धमक कच्चा घड़ा आवारगी
मोहसिन नक़वी
ग़ज़ल
न जाने कौन सा आतिश-फ़िशाँ था मेरे सीने में
कि ख़ाली था बहुत फिर भी धमक कर फट पड़ा था मैं
अनवर शऊर
ग़ज़ल
तिरे उस ख़ाक उड़ाने की धमक से ऐ मरी वहशत
कलेजा रेग-ए-सहरा का भी दस दस गज़ थिलक्ता था
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
जिस क़दम की धमक से सितारों के फ़ानूस जलते रहे
उस क़दम का निशाँ चूम कर मैं भी मंज़र बनाता रहा
शब्बीर हसन
ग़ज़ल
धमक वो आह के नारे की अपने है कि गर्दूं से
सितारे टूटे पड़ते हैं कुएँ जाते हैं दह दह कर