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ग़ज़ल
दीदा-ए-बे-रंग में ख़ूँ-रंग मंज़र रख दिए
हम ने इस दश्त-ए-तपाँ में भी समुंदर रख दिए
बख़्श लाइलपूरी
ग़ज़ल
उदासी थी कि था इक जल्वा-ए-सद-रंग-ओ-बू शायद
दिल-ए-बे-रंग भी रंगों का शीराज़ा नज़र आया
सय्यद अमीन अशरफ़
ग़ज़ल
न तड़प तू ज़ेर-ए-ख़ंजर दिल-ए-बे-क़रार सो जा
जो यहाँ ना नींद आए तो तह-ए-मज़ार सो जा
उफ़ुक़ लखनवी
ग़ज़ल
क़द्र बिलग्रामी
ग़ज़ल
सरदार हम्माद मुनीर
ग़ज़ल
खो कर तिरी गली में दिल-ए-बे-ख़बर को मैं
फ़िक्र-ए-ख़ुदी से छूट गया उम्र भर को मैं
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
दिल-ए-बे-क़रार चला तो था गिला-ए-हयात लिए हुए
ग़म-ए-इश्क़ रूह पे छा गया ग़म-ए-काएनात लिए हुए