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ग़ज़ल
चल पड़ेगा फिर बयाँ इक चाँद से रुख़्सार का
याद फिर ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म दिलाए जाएँगे
आज़िम कोहली
ग़ज़ल
तुम्हारी तारीख़ कोई बदले उसे मिटाए तो सर उठाओ
अगर शराफ़त न काम आए न हक़ दिलाए तो सर उठाओ
अहया भोजपुरी
ग़ज़ल
याद चश्म-ए-बुत-ए-मग़रूर दिलाए है मुझे
दोस्तो तुम गुल-ए-नर्गिस मुझे लिल्लाह न दो