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ग़ज़ल
ऐ जरस हरज़ा-दिरा हो न तू इतना चुप रह
पहुँचे पस-माँदा ब-मंज़िल वो सदा और ही है
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
ग़ज़ल
अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो