आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "dol"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "dol"
ग़ज़ल
बीते लम्हे ध्यान में आ कर मुझ से सवाली होते हैं
तू ने किस बंजर मिट्टी में मन का अमृत डोल दिया
शकेब जलाली
ग़ज़ल
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
ग़ज़ल
झुके हुए पेड़ों के तनों पर छाप है चंचल धारे की
हौले हौले डोल रही है घास नदी के किनारे की
ज़ेब ग़ौरी
ग़ज़ल
फिर तैर के मेरे अश्कों में गुल-पोश ज़माने लौट चले
फिर छेड़ के दिल में टीसों के संगीत गई रुत बीत गई
मजीद अमजद
ग़ज़ल
वो डोल डालें किसी कार-ए-पाएदार का क्या
जो बे-सबाती-ए-उम्र-ए-रवाँ में रहते हैं
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
ग़ज़ल
वो तिरा पल-भर को मिलना फिर बिछड़ने के लिए
दिल की मुट्ठी में है इस लम्हे का जुगनू आज भी
ख़ुर्शीद रिज़वी
ग़ज़ल
रिश्ते के उलझे धागों को धीरे धीरे खोल रही है
बिटिया कुछ कुछ बोल रही है पूरे घर में डोल रही है