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ग़ज़ल
ये और बात कि अनजाने लग़्ज़िशें हो जाएँ
मगर शुऊ'र-ए-हराम-ओ-हलाल रखते हैं
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
ग़ज़ल
जिस्म-ए-ख़ाकी तुझ को शीशे की हवेली ही सही
ऐ चराग़-ए-जाँ कभी फ़ानूस के बाहर तो आ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
ताबाँ मिसाल-ए-शम्अ हैं फ़ानूस-ए-नूर से
हर-चंद पाइचों में हैं मस्तूर पिंडलियाँ
कल्ब-ए-हुसैन नादिर
ग़ज़ल
शम्-ए-फ़ानूस-ए-तलब हर रंग में रौशन रहे
ख़ूँ-फ़िशानी के मज़े लो गुल-फ़िशानी फिर सही
मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी
ग़ज़ल
तसव्वुर में तसद्दुक़ में हूँ मैं उस शम्अ-रू ऊपर
हैं गोया 'इश्क़' हम तस्वीर-ए-फ़ानूस-ए-ख़याली के
इश्क़ औरंगाबादी
ग़ज़ल
शम्अ' रौशन जिस्म-ए-फ़ानूस-ए-ख़याली में है आज
रूह जूँ मिस्ल-ए-मगस मक्ड़ों की जाली में आज
मिस्कीन शाह
ग़ज़ल
अल्लह अल्लह शौक़-ए-सज्दा-रेज़ी-ए-दैर-ओ-हरम
ये जबीं झुकते ही तेरे आस्ताँ तक आ गई
मुस्लिम मलेगाँवी
ग़ज़ल
असीरान-ए-फ़रेब-आराइ-ए-दैर-ओ-हरम आख़िर
सुलगते 'आरिज़ों की दिलकशी का राज़ क्या जानें