आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "faaras"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "faaras"
ग़ज़ल
जब हुआ महव-ए-अदा बाग़ में वो ख़ुसरव-ए-हुस्न
फूलों के अक्स से गुलगूँ फ़रस-ए-नाज़ हुआ
मुनीर शिकोहाबादी
ग़ज़ल
दौड़ाती है ये रूह मिरी जिस्म को हर-सू
असवार उड़ाता है ज़माने में फ़रस को
मिर्ज़ा मासिता बेग मुंतही
ग़ज़ल
लरज़ जाता है थोड़ी देर को तार-ए-नफ़स मेरा
सर-ए-मैदाँ कभी जब जस्त करता है फ़रस मेरा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
ग़ज़ल
जैसे फ़ारस में ख़ुलासा है ज़बान-ए-शीराज़
वैसी ही हिन्द में है पाक ज़बान-ए-देहली